आओं बच्चो तुम्हे सुनाएं
कविता वृत्त महान की
परिधि और व्यास के रेसो पाई के बलिदान की
वंदेमातरम वंदेमातरम
ये है अपना स्थिर बिंदु , केंद्र यही कहलाता है
चाप केन्द्र पर बने कोण के अंश में नापा जाता है
परिधि के दो बिंदु मिलते जीवा ये कहलाती है
स्पर्शी तो सदा वृत्त को छूकरके ही जाती है
अर्धवृत्त में बने हमेशा नब्बे कोण महान की
आओं बच्चो तुम्हे सुनाएं कविता वृत्त महान की
परिधि और व्यास के रेसो पाई के बलिदान की
वंदेमातरम वंदेमातरम
एक छोटा सा वृत्तखंड है कोंण बराबर रखता है
केंद्र से डाला लम्ब सदा जीव को अर्धित करता है
तीन अरेख बिन्दुओ से बस एक वृत्त ही जाता है
चाप केंद्र पर परिधि से क्यों दूना कोण बनाता है
चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख संपूरक कोण महान की
आओं बच्चो तुम्हे सुनाएं कविता वृत्त महान की
परिधि और व्यास के रेसो पाई के बलिदान की
वंदेमातरम वंदेमातरम
स्पर्शी और त्रिज्या में क्यों नब्बे की लड़ाई है
वृत्त की सबसे लंबी जीवा यहाँ व्यास कहलाई है
दो प्रतिछेदी रेखाएं क्यों सम आयत बन जाती हैं
बाह्य बिंदु से दो स्पर्शी इक्वल पायी जाती हैं
एकांतर वृत्खंड में बनते इक्वल कोण महान की
आओं बच्चो तुम्हे सुनाएं कविता वृत्त महान की
परिधि और व्यास के रेसो पाई के बलिदान की
वंदेमातरम वंदेमातरम