""हैं मनुज नहीं ये नर पिशाच
इनका तो वध करना होगा
कब तक होगा ये नग्न नाच
कौन्तेय युद्ध करना होगा
ये नहीं दया और क्षमापात्र
सब मानवता के भक्षक हैं
इस कलियुग में तू जन्मेजय
ये पापी सारे तक्षक हैं
बस बहुत हो चुका कायरपन
तू मन में कुछ विक्षोभ न कर
गांडीव उठा कर काट इन्हे
ये देशधर्म संकोच न कर "