Friday, November 30, 2012

सूरज कि किरणों के सम्मुख आज सुबह अलसाई होगी
केशो को सुलझाया होगा फिर थोड़ी मुस्काई होगी
दर्पण के अभिमुख हो कर के मेरी सूरत सोची होगी
फिर प्रभु कि मूरत में उसने मेरी मूरत देखि होगी
फिर चेहरें को स्वयं छिपा कर थोड़ी सी शरमाई होगी
सूरज कि किरणों के सम्मुख आज सुबह अलसाई होगी

अहो कितना परिवर्तन है

चार साल पहले पहली बार
जब चेन्नई पहुंचा था
सुबह सुबह चेन्नई सेंट्रल
के पास कितना अच्छा लग रहा था
सडके साफ़ लोग कतारों में
लग रहा था की कितना सृमृध
है मस्तिष्क से ये समाज
तुलना कर रहा था उत्तर से
आज जब वापस आया सोचता
 हुआ की शायद सब कुछ
वैसा ही होगा जैसा
आया था छोड़कर
 लेकिन हाय समय की पुकार
चारो और हाहाकार,
चीत्कार, मानवता तार -तार
बस शोर करता हुआ पैसा
कभी ट्रक कभी टेम्पो
कभी बस के रूप में
 कर रहा था प्रदूषित
 मानव की आत्मो को
कर रहा था हनित
वाह क्या सम्यवर्तन है
अहो कितना परिवर्तन है

TEEN PAHIYE WALA BHI BUSY HAI

जीवन की भागदौड़
किसी दफ्तर में नहीं
आम सड़क पैर देखता हूँ
जब तीन पहिये को चलाने वाला
एक स्पाइडरमैन की भाँती
पूरी सड़क पैर राज करता है
कभी ट्रक के बायें से
बस छूकर ही जाता है
कभी बसों के बीच के
छोटे से स्थान में 
कभी मोड़ पर मुडते हुए
जब उसके पैर दिन भर
की आजीविका बढाने के लिए
अनवरत चलते ही रहते हैं
एक मंजिल से अगली  मंजिल
ब्राउनी गति में  उसका पथ
मुझे अपनी व्यस्तता
 फीकी लगती है तब
जीवन का ये खेल जिसमे
सब लोग भाग रहे हैं
शायद तीन पहिये वाला
भी अछूता नहीं है उससे
अंतर है बस हम ऐसी
के डिब्बो में भाग रहे हैं '
वो ऐसी के डिब्बो तक भागता है

मरजिया और बूँद

हे बूँद, बन जाओ ना सीप का मोती,
कुछ कणों के मार्मिक स्पर्श से
कुछ क्षणों के आत्मिक संघर्ष से
चमकती परतों के बोझ में दबकर
अपने आप को अवतरित हो जाने दो
मैं रहा हूँ जलधी के गर्भ में
मुझे मिल जाना केवल इसी सन्दर्भ में
बेचकर ही तुम्हे दूर कर सकता हूँ
अपने बिलखते बच्चो की भूख प्यास
इस मरजिये के स्वार्थ के लिए
या मानकर इसे किसी परमार्थ के लिए
हे बूँद, बन जाओ ना सीप का मोती...
.'दिल बैचैन है??, ये मदमस्त हवा और ये मौसम
लगता है उसके शहर में आये ही नहीं हैं ""
वक्त की कब्र में दफ्न कर आरजू वो भी जलते रहे हम भी जलते रहे"
हुई है क्या ये जिंदगी अपनी
कि शब्द भी गैरो के अब तो हो गए
आकर तेरे आगोश में ए सनम
हम बिना पैरों के अब तो हो गए
स्वप्न कि दुनिया के बादशाह थे
गुलाम सवेरो के अब तो हो गए
हुई है क्या ये जिंदगी अपनी
कि शब्द भी गैरो के अब तो हो गए
aag lago to us busti mein
desh droh ki boo aati ho
sheesh kat lo us hasti key
janlok pal se sharmaati ho
ye kya dard bhala samjhengey
desh ki bhukhi janta ka
are Ac se jinki gaadi bus
phir AC tak hi jaati ho
Anna ki bhoodhi aankho ke
krodh ko mat bhadkao bacchey
dand tumhey dengi ye aisa
rooh nark mein tharrati ho
lok pal per shish juhkao
paryschit gar karna chaho
kaun bhala bach sakta chooha
jab desh ki janta gurrati ho
aag lago to us busti mein
desh droh ki boo aati ho

आशिक का गुस्सा

नींद भी आ गयी, स्वप्न भी आ गए
और चेहरा तुम्हारा दिखा भी नहीं|
अब तो यादे तुम्हारी मृतक हो गयी,
और ये आशिक बेचारा बिका भी नहीं||
आज पानी में मैंने प्रवाहित किया,
पुष्प जिसको कि तुमने दिया था कभी|
फेंक दी प्रेम पाती सभी अग्नि में,
दिल हमारा तनिक भी दुखा ही नहीं||
नींद भी आ गयी, स्वप्न भी आ गए,
और चेहरा तुम्हारा दिखा भी नहीं||

""चुराके चंद साँसों से लम्हे ,
गुफ्तगू हम करते रहे
सिकंदर-ए-फुरसतिया समझके ,
वो अपने घर में संवरते रहे"
शिकन बाकी दुखन बाकी उसके इल्जाम अभी बाकी है
मिटा दे ए शराब मुझको सुलगती शाम अभी बाकी है
आज फिर नींद काफूर हो गयी है
आज फिर आरजू मगरूर हो गयी है
आज फिर एक नयी मंजिल दिख गयी है
मौत फिर चार कदम दूर हो गयी है ""
शेर को कब हैं डराती गीदड़ों की भब्कियां
गर्दिसो से ही बनी है जिंदगी में मस्तियाँ
डूबने का डर उसे हैं बिजलियों से जो डरे
हम तो वो हैं साहिलों में जो चलाते कश्तियाँ"
.""वक्त क्या हमसे कहेगा बीते कल का वाकया
आज हम जो कुछ करेंगे दास्ताँ बन जायेगी ""
."karwein bantey hi kyon hain?
toot jaaney ke liye?????
Mitra ye miltey hi kyom hain?
choot jaaney ke liye????
तुम्हारी नफरते ही आज मेरे काम आ गयी
हमारी बेबसी को शायरी का नाम मिल गया
hamney khuda se maanga ab dost na dena
usney kaha ji paoogey kya is ibadat se//
hamney kaha dukh hota hai chodakar unko
usney kaha dil bhar gaya kya ab saraart se
.ये इश्क के मामले बड़े संगीन होते हैं
ये हसीन होते हैं या फिर ग़मगीन होते हैं
वो दिख रहे हैं सफ़ेद पंछी कि पी का रस्ता बता रहे हैं ?
वो चल रहीं हैं हिलोर लहरे कि पी कि धडकन सुना रहे हैं ?
कि कोई पूछे क्यों चुप खडे हैं यहाँ अकेले तो बोल देना ?
सुकून देती हैं ये प्रकृति कि पी से मुझको मिला रहे हैं"
वो परेशाँ था, क्यों हम कुछ ना कहें?
मै चुप था कि, बस वो परेशाँ ना रहे ""
ए परिंदों बना लो मंजिलों को पाना शौक अपना
और फिर उस शौक को अंजाम दे दो |
हर एक अंजाम से एक शौक को पैदा करना
के अपनी जिंदगी को ये नया पैगाम दे दो ||"
कह रहा मासूक से महबूब है
वाह तेरी दुश्मनी भी खूब है
पहले मिलने को जो पागल थी जमीं
आज कहती कितना पागल 'दूब' है

आ भी जाओ हे प्रियवर

tumharey man ki pushpkali ne,
hamarey man ko dastak di |
ki ab to priyvar aa bhi jaao
hamarey man ne aahat ki ||

hamari pavan si aarjoo thi,
tumhari dhadkan ko sochney ki |
ki jab bhi sochi tumhari saansey,
hamari saansey sunai di ||
ki ab to priyvar aa bhi jaao,
hamarey man ne aahat ki ||

mai jab bhi choota hoon koi jharna,
koi samandar koi nadi|
dekhai deti hain wo tarangey,
tumharey man ne preshit ki||
ki ab to priyvar aa bhi jaao,
hamarey man ne aahat ki"||
."कभी हमने जमाने को जमाना ही नहीं समझा

कहीं दिल थामकर कोई फ़साना भी नहीं समझा

मगर क्यूं याद आती है तुम्हारी आज भी मुझको

तुम्हारी याद में खुद को दीवाना भी नहीं समझा""
मेरी तन्हाइयां उसको मजाक लगती हैं
मेरी रुसवाईयाँ उसको मजाक लगती हैं
मै कैसे सुना दूं दर्द-ए-दिल दास्ताँ उसको
मेरी सच्चाइयां उसको मजाक लगती हैं ||"
मंजिलों और मुस्किलो में दोस्ती चलती रहे,
है मजा जब ही कि तब भी जिंदगी चलती रहे |
आग पानी और बवंडर आंधियां तूफ़ान हों,
है मजा जब ही कि तब भी दिल्लगी चलती रहे||"

मन हमारा हो गया तो हो गया

""मन हमारा हो गया तो हो गया
मन हमारा खो गया तो खो गया
हर गमो को खिलखिलाकर पी लिया
पेश कर दी कुछ नयी मुस्कराहटे
किन्तु गर्वितह्रदया तू क्या जानती
हम तुम्हारी एक हंसी पर मर मिटे
तू क्या चाहे तू हँसे तो हम हँसें
दिल हमारा रो गया तो रो गया
मन हमारा हो गया तो हो गया
मन हमारा खो गया तो खो गया
कितनी राते दिन में हमने काट दी
कितने दिन काटे हैं हमने रात में
किन्तु स्वप्नों कि परी क्या जानती
मम ह्रदय कि वेदना बरसात में
तू क्या चाहे तू जगे तो हम जगे
मस्त बंदा सो गया तो सो गया
मन हमारा हो गया तो हो गया
मन हमारा खो गया तो खो गया""
जिंदगी मुश्किल अगर है मुस्कुराना सीख लो
दूर भी मंजिल अगर है दिल लगाना सीख लो
छेदकर आकाश,गंगा तुम बहाना सीख लो
शूल से भी दिल लगाना चोट खाना सीख लो
तू है राही इस जगत का तुझको क्या है सोचना
दूर तारे भी अगर हो तोड़ लाना सीख लो
पर जमाना चाहता है गर, तेरे आंसू गिरें /
तो जमाने को भी मिटटी में मिलाना सीख लो
जिंदगी मुश्किल अगर है मुस्कुराना सीख लो
जिंदगी मुश्किल अगर है मुस्कुराना सीख लो
कोई शिकवा नहीं? ,गिला नहीं ? कोई शिकायत भी नहीं !!
किसी को फुर्सत ही नहीं ? या किसी को लियाकत ही नहीं ?
या कह दो कोई जरूरत ही नहीं ? या फिर इजाजत ही नहीं
हम भी कहीं कुछ सोचते होंगे किसी को गोर-ए-इनायत भी नहीं ||"
."हमने हंसना छोड़ दिया है छोटी छोटी बातो पर
हमने मरना छोड़ दिया है अब झूटे जज्बातों पर
हम अब देख चुके ये दुनिया कितने नाच नचाती है
हमने रोना छोड़ दिया है कल कि बीती रातो पर
हमने हंसना छोड़ दिया है छोटी छोटी बातो पर"
मुझे कुछ फिक्र नहीं है कि तुम कैसे हो ?
फिर भी ये बता देना कि मन लग गया है ?
तुम्हारा जिक्र तो नहीं है मेरी यादो में
फिर भी ये पता देना कि सावन लग गया है ?"

नए रिश्ते

""नए रिश्ते बनाने में जरा सा सब्र कर लेना
ये बनते है बड़ी जल्दी,बिगडते हैं बड़ी जल्दी
किसी का मन समझने में जरा सा वक्त ले लेना
जो मिलते हैं बड़ी जल्दी, बिछडते हैं बड़ी जल्दी"""
चंद अल्फाजो ने ही तो जिंदगी आबाद कर दी
वरना हम तो कह चुके थे मौत भी अपनी नहीं है

आवारा दिल

तन्हाई में एक एक पल अब अरसे में तब्दील हुआ है
जब से तुमने पलके झपकी आंसू बहकर झील हुआ है |
हमने दिल कि धडकन को समझाने कि कोशिश कि थी
लेकिन ये आवारा निकला पहले ही तकमील हुआ है ||"

शहर के लोग

अजीब शहर है कि लोग हंसते भी नहीं मिल कर
कभी गिर जाए कोई तो ठहाके फूट जाते हैं"

एहसास

."कभी दिल कि तराजू से मेरे एहसास को ही तौल
तुझे अपनी ही धडकन में वजन महसूस भी होगा """

इश्क = मृत्यु

.""शमा गर जानती होती मोहब्बत चीज क्या कर है?
तो परवाना कभी भी मौत को परवान ना होता
वो जलती है जलाती है जलाकर बुझ भी जाती है
बेचारा गर समझ जाता कभी कुरबान ना होता"

दिल है की मानता नहीं

तू अब भी याद आ जाए तो हम करे क्या क्या ?
जरा सा वक्त तो लगता है अपनों को भुलाने में
आवारा दिल दिल्लगी कर जाए तो हम करें क्या क्या?
जरा सा वक्त तो लगता है नजरो को चुराने में
ये आकर तेरा सवाल कर जाए तो हम करे क्या क्या?
जरा सा वक्त तो लगता है परिंदों को उडाने में
ये सपने हैं दगाबाज हो जाएँ तो हम करे क्या क्या ?
जरा सा वक्त तो लगता है अपने को मिटाने में

???

""पूरी दुनिया ने ही मारे थे मेरे जिस्म पे खंजर
किस किस को सजा दूं किस किस को छोड़ दूं ""

eid

"कुछ दूर क्या हुए महफ़िल से मेरे दोस्त
तुने तो इस ईद पर सेवैयाँ भी नहीं दी""

सिंहनाद

."जरा लहरों में अपनी गर्जना से जोश ला सागर
सिकंदर तान सुनने को तेरी खुद आज आया है
जरा मेघों से अपने बोल कर तू गडगडा अम्बर
कि दिल कि बात सुनने का मेरा मन आज आया है "

रक्षाबन्धन

.""शुभ हो सबको रक्षाबन्धन |
शुभ हो सबको रक्षाबन्धन ||
हो रक्षित भगिन-भ्रात सब |
हो रक्षित सब जीवन-जन ||
शुद्ध सरल मन और आत्मा |
हो रक्षित सब तन,मन,धन
शुभ हो सबको रक्षाबन्धन ||
शुभ हो सबको रक्षाबन्धन ||"

दर्द

जिन रिस्तो की सच्चाई पर
पूरी दुनिया से झगडा मै,
उन रिस्तो के झूठेपन ने
आज मुझे तडपा डाला ||
जिसको पाने की चाहत में
पैमानों को तोडा हमने
उसके जाने के एवज में
आज बिछा दी मधुशाला||"

नरक में नेता

""चित्रगुप्त ने एक दिन डाला,
घोटालों पर ध्यान
किसको कितनी सजा मिलेगी,
क्या है दंड विधान
क्या है दंडविधान,
सोच कर सर चकराया
धरमराज के पास.
त्यागपत्र भिजवाया
हे प्रभु जी माफ करना,
सोच कर ही जा रहा हूँ
पर नरक कि स्थिति को,
देख कर दुःख पा रहा हूँ
खाते हैं जो चारे प्रतिदिन,
उनको गर्म तेल में डाला
सारे तेल कनस्तर खाली,
नर्क जेल में भी घोटाला
फिर सोचा कि शाल्मली से,
बाँध पकड़कर इन्हे तपाऊँ
पंचक –चंडक दोनों गायब,
उनके पाश कहाँ से लाऊँ
रिश्वत मुझको भी देते हैं
इसलिए शर्मा रहा हूँ
हे प्रभु जी माफ करना,
सोच कर ही जा रहा हूँ"" (क्रमशःबाकी के घोटाले फिर कभी अभी चित्रगुप्त को रोकना है) सुबोध

बहुत मुबारक जन्मदिवस हो||

बहुत मुबारक जन्मदिवस हो

बहुत मुबारक जन्मदिवस हो||

वसुधा से अम्बर तक यश हो

हर प्रस्तर तेरा पारस हो

रिधि सिद्धि परिपूर्ण कलश हो

परिजन मित्र सदा ही खुश हो

प्रभु की कृपा सदा सरबस हो

जीवन में बस रस ही रस हो

बहुत मुबारक जन्मदिवस हो

बहुत मुबारक जन्मदिवस हो ||

वक्त

""बदल जाती है तरजीह ,
वक्त कि अंगडाईयो के साथ
ना जाने क्यों अब तक
यकीं नहीं आता है ||"""

हँस के चलो

हँस के चलो
मुस्कुराके चलो
जिंदगी को
जिंदगी बना के चलो
तुम जमीं पे चलो
या आसमा पे चलो
चलो जहाँ भी चलो
दिल मिला के चलो
गीत गा के चलो
गुनगुना के चलो
जिंदगी को
जिंदगी बना के चलो
कुछ सुन के चलो
या कुछ सुना के चलो
मगर दिलो कि दूरियो को
तुम मिटाके चलो
अब यहाँ से चलो
मगर खिलखिला के चलो
जिंदगी को
जिंदगी बना के चलो

मात्रभाषा हिंदी को उसके जन्मदिवस पर हार्दिक नमन

'मात' हमारी 'मीत' हमारी तुम ही हिंदी
'प्रात' हमारी 'प्रीत' हमारी तुम ही हिंदी
'रात' हमारी 'रीत' हमारी तुम ही हिंदी
'गात' हमारी 'गीत' हमारी तुम ही हिंदी
'जात' हमारी 'जीत' हमारी तुम ही हिंदी
'मात' हमारी 'मीत' हमारी तुम ही हिंदी

""एक प्रेमी का गुस्सा""(Anger of a lover)


नींद भी आ गयी, स्वप्न भी आ गए
और चेहरा तुम्हारा दिखा भी नहीं|
अब तो यादे तुम्हारी मृतक हो गयी,
और ये आशिक बेचारा बिका भी नहीं||
आज पानी में मैंने प्रवाहित किया,
पुष्प जिसको कि तुमने दिया था कभी|
फेंक दी प्रेम पाती सभी अग्नि में,
दिल हमारा तनिक भी दुखा ही नहीं||
नींद भी आ गयी, स्वप्न भी आ गए,
और चेहरा तुम्हारा दिखा भी नहीं||

.मुसाफ़िर हो तुम तो सराय हम हैं

.मुसाफ़िर हो तुम तो सराय हम हैं
थकित अगर हो उपाय हम हैं ||
अँधेरी राहें चिराग हम हैं
नदी अगर हो प्रयाग हम हैं ||
ये रेत तुम हो बयार हम हैं
गुमी है लाइफ तो प्यार हम हैं||
कवि अगर हो तो वाह हम हैं
मेरे समन्दर प्रवाह हम हैं ||
तुम्हारी कलमो के चित्र हम हैं
अकेले गर हो तो मित्र हम हैं ||
अरे रिसर्चर विचार हम हैं
अगर हो गायक सितार हम हैं||
तू सैर-ए-गाफिल तो बार्ज(barge) हम हैं
मेरे मोबाइल रिचार्ज (recharge) हम हैं ||
तू राज गर है सीमेंट (cement )हम हैं
तू फेसबुक है कमेन्ट(comment)हम हैं ||
अकेले राही के साये हम हैं
मुसाफिर हो तुम तो सराय हम हैं ||"

फूलो की सांत्वना : जैसे हो वैसे रह


तू जैसा है वैसा ही रह
इस दुनिया की परवाह न कर
तू जैसा है वैसा ही रह
इस दुनिया की परवाह न कर
ये दुनिया पागल समझेगी
आवारा घायल समझेगी
तेरे आँखों के आंशू को
कोई घटिया आयल समझेगी
इस मृगतृष्णा के धोखो से
दिल में अपने कड़वाह न भर
तू जैसा है वैसा ही रह
इस दुनिया की परवाह न कर

एक सच

""बड़ी दूर से आया है मेरे बेटे का खत
डाकिये पढ़ के सुना मिठाई दूँगी |"" --(सेना के एक जवान कि माँ ने कहा )

  '''मै कैसे बता दूं कि तेरी आँख का तारा
आकाश के तारों में तैनात हुआ है "" (रोता हुआ डाकिया )"

होली मंगलमय हो

रंग बिरंगी मस्ती वाली खुशी लुटाती होली हो
प्रेम भावना को बरसाती कलुष मिटाती होली हो ||
नाच उठो फाल्गुन के रंग में नाच नचाती होली हो
ढोल, मंझीरे, झांझ बजाती गीत सुनाती होली हो ||
गेंहूँ की बाली के संग बलखाती सी होली हो
सरसों के संग आँख मिचोली इठलाती सी होली हो ||
रंग अबीर गुलाल लगाती गले लगाती होली हो
मन के सारे पाप जलाती पुण्य बढ़ाती होली हो ||
गुझिया दही बड़े संग मठरी हमे खिलाती होली हो
बच्चे-बूढे, देवर-भाभी मित्र मिलाती होली हो ||
राधा के संग कृष्ण नचाती स्नेह बढ़ाती होली हो
जीवन के रस में अमृत की गंग बहाती होली हो ||
प्रेम भावना को बरसाती कलुष मिटाती होली हो
रंग बिरंगी मस्ती वाली खुशी लुटाती होली हो ||

ऐ रूम मेरे

ऐ रूम मेरे
मासूम मेरे
नित दिवस रात
थे साथ साथ
अब विवश खड़ा जाने को यार
तुझको मेरा है नमस्कार
तुझको मेरा है नमस्कार
जब थकित हुआ
या व्यथित हुआ
या फिर मेहनत कर
पकित हुआ
तेरा आश्रय तेरा ही प्यार
तुझको मेरा है नमस्कार
तुझको मेरा है नमस्कार
जब भोर हुई
कुछ शोर हुई
चीं चीं चीं चीं की मीठी धुन
मेरे कानो की ओर हुई
जैविक संकेत के रचनाकार
तुझको मेरा है नमस्कार
तुझको मेरा है नमस्कार
बिस्तर,टेबल,इन्टरनेट पोर्ट
तेरी छाया, वायु और सपोर्ट
तेरे अंदर का शीत महल
लगता है मुझको रेड्फोर्ट
बरसाते रहना ये सुखद प्यार
अब विवश खड़ा जाने को यार
तुझको मेरा है नमस्कार
तुझको मेरा है नमस्कार

हम काँटे हैं |

हमने फूलों के दर्द खुद आगे बढ़कर बांटे हैं ..........................
हम काँटे हैं |
ग्रीष्म ऋतू के अनल अंगारे
बारिश की ठंडी फव्वारें
उनके तन को छूने वाले
कल कल जल के वो पतनारे
करना चाहें उन्हे पतनमुख
बस हमने ही डांटे हैं
.................................................हम काँटे हैं |
वो मधुलोभी भंवरे आते
तीखे पैने डंक चुभाते
साथी पुष्प सदा मुस्काते
किन्तु प्रिये हम सह नहीं पाते
उन पुष्पो की चीख के पीछे
छिपे हुए सन्नाटे हैं |
.................................................हम काँटे हैं|

मानव स्वार्थ दृष्टि से आयें
उनको तोडे औ मुस्काएं
मेरे प्रीतम को ले जाकर
अपने प्रियतम इष्ट मनाएं
मनुज वसन चीरकर हम भी
लेते प्रतिशोधी खराटें हैं |
....................................................... हम काँटे हैं |
हमने अपना धर्म निभाया
मातृभूमि पर शीश कटाया
जब तक चेतन प्राण रहे
प्रियतम को ही सुख पहुँचाया
किन्तु बलिदानी होकर भी पाए
क्यों तिरस्कार के चांटे हैं ?
.............................................................हम कांटे हैं |

हमने फूलों के दर्द खुद आगे बढ़कर बांटे हैं ..........................
हम काँटे हैं |
"

वो दिवस बडे ही अच्छे थे जब हम छोटे से बच्चे थे

वो दिवस बड़े ही अच्छे थे
जब हम छोटे से बच्चे थे
बाहर कितनी शैतानी थी
अंदर से कितने सच्चे थे ||
जब हम तुत्लाया करते थे
घोडे पर जाया करते थे
दादा जी जब गिर पड़ते थे
हम जीभ दिखाया करते थे
हम उनकी आँख के तारे थे
हम उनकी हंसी के लच्छे थे
वो दिवस बड़े ही अच्छे थे
जब हम छोटे से बच्चे थे ||
कितना ही रोदन कर डालें
कितना ही चरणप्रहार करें
कितना हम उधम मचाये हम
कितना ही हाहाकार करें
पर मा कि गोदी में सदा रहे
हम अक्ल के थोड़े कच्चे थे
वो दृश्य बड़े ही अच्छे थे
जब हम छोटे से बच्चे थे||
कितने ही प्रश्न प्रलाप करें
कितना ही घोर विलाप करें
कैसे मिल पाए वो बचपन
जहाँ पुण्य करे या पाप करें
कितना सुन्दर था अमृत वन
हम अंगूरों के गुच्छे थे
वो दिवस बड़े ही अच्छे थे
जब हम छोटे से बच्चे थे
बाहर कितनी शैतानी थी
अंदर से कितने सच्चे थे ||