हर शख्स क्यों पेंचीदा होता जा रहा है?
कुछ हम बदल गए हैं या तुम या जमाना
फिर क्यों मामला संजीदा होता जा रहा है?
मेरा तो शौक़ था तारो को गिन के सोने का
फिर क्यों आसमा उनीदा होता जा रहा है
हर शख्स क्यों पेंचीदा होता जा रहा है?
हमे तो फक्र था के राहगीर मिलते थे
आज क्यों कारवां चुनीदा होता जा रहा है
हर शख्स क्यों पेंचीदा होता जा रहा है?
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