हे जलद पुत्री
तेरा तो है नाता मुझसे
मै हूँ जलधी नाना तेरा
भाग रही क्यों मुझसे
तो तो बड़ी अमूल्य निधि है
नहीं छिपा है मुझसे
रवि किरणों से आह्लादित स्वाति नखत से आशीर्वादित
केले पैर जब पड़ती हो
उससे मिल केपूर बनाती
सर्व सुगंधि करती हो
या फिर गिरो किसी बांस पर
प्रेक्चप द्रव्य बनाती हो
सारे रोग दूर करती हो
फिर भी क्यों कतराती हो
मेरी सूक्ति में आ जाती
सच्चा मोती बनती हो
हो कितनी अमूल्य तो फिर क्यों
इतना क्रंदन करती हो
तेरा तो है नाता मुझसे
मै हूँ जलधी नाना तेरा
भाग रही क्यों मुझसे
तो तो बड़ी अमूल्य निधि है
नहीं छिपा है मुझसे
रवि किरणों से आह्लादित स्वाति नखत से आशीर्वादित
केले पैर जब पड़ती हो
उससे मिल केपूर बनाती
सर्व सुगंधि करती हो
या फिर गिरो किसी बांस पर
प्रेक्चप द्रव्य बनाती हो
सारे रोग दूर करती हो
फिर भी क्यों कतराती हो
मेरी सूक्ति में आ जाती
सच्चा मोती बनती हो
हो कितनी अमूल्य तो फिर क्यों
इतना क्रंदन करती हो
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