Subodh dubey a lover of physics
Wednesday, March 5, 2014
काश तुम्हारी भाभी होती
सप्तवर्ण से अम्बर राजित चपला ह्रदय करे आह्लादित इस पावस में झूम –झूमकर मन मयूर सा किन्तु विचलित विचलित मन के बंद सदन की किचित कोई चाभी होती काश तुम्हारी भाभी होती काश तुम्हारी भाभी होती
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