""क्यों अकेला है पथिक""
क्यों अकेला है पथिक तू, मार्ग में चल संग हो लें |
कित तुझे जाना मुसाफिर, साथ में मुझको भी ले ले ||
क्यों अकेला है पथिक तू, मार्ग में चल संग हो लें |
चल पहाडो के शिखर को, साथ छू लें साथ खेलें ||
जब कठिन दुर्गम सफ़र हो, हाथ दे दे हाथ ले ले||
क्यों व्यथित हे? क्यों दुखित है? अश्रु तेरे क्यों निरंतर|
देख मुझको प्राप्त कर ले, मस्त रहने का प्रिये वर||
आज पुष्पों को बिछा दें, मार्ग कितना भी हो दुष्कर|
प्रेम की गंगा बहा दें, कंटको की बेलियो पर||
आज तेरी धमनियों संग, धमनियां मेरी भी बोलें|
क्यों अकेला है पथिक तू, मार्ग में चल संग हो लें|| सुबोध 15/3/2014
क्यों अकेला है पथिक तू, मार्ग में चल संग हो लें |
कित तुझे जाना मुसाफिर, साथ में मुझको भी ले ले ||
क्यों अकेला है पथिक तू, मार्ग में चल संग हो लें |
चल पहाडो के शिखर को, साथ छू लें साथ खेलें ||
जब कठिन दुर्गम सफ़र हो, हाथ दे दे हाथ ले ले||
क्यों व्यथित हे? क्यों दुखित है? अश्रु तेरे क्यों निरंतर|
देख मुझको प्राप्त कर ले, मस्त रहने का प्रिये वर||
आज पुष्पों को बिछा दें, मार्ग कितना भी हो दुष्कर|
प्रेम की गंगा बहा दें, कंटको की बेलियो पर||
आज तेरी धमनियों संग, धमनियां मेरी भी बोलें|
क्यों अकेला है पथिक तू, मार्ग में चल संग हो लें|| सुबोध 15/3/2014
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