हे
बूँद,
बन
जाओ
ना
सीप
का
मोती,
कुछ कणों के मार्मिक स्पर्श से
कुछ क्षणों के आत्मिक संघर्ष से
चमकती परतों के बोझ में दबकर
अपने आप को अवतरित हो जाने दो
मैं आ रहा हूँ जलधी के गर्भ में
मुझे मिल जाना केवल इसी सन्दर्भ में
बेचकर ही तुम्हे दूर कर सकता हूँ
अपने बिलखते बच्चो की भूख प्यास
इस मरजिये के स्वार्थ के लिए
या मानकर इसे किसी परमार्थ के लिए
हे बूँद, बन जाओ ना सीप का मोती...
कुछ कणों के मार्मिक स्पर्श से
कुछ क्षणों के आत्मिक संघर्ष से
चमकती परतों के बोझ में दबकर
अपने आप को अवतरित हो जाने दो
मैं आ रहा हूँ जलधी के गर्भ में
मुझे मिल जाना केवल इसी सन्दर्भ में
बेचकर ही तुम्हे दूर कर सकता हूँ
अपने बिलखते बच्चो की भूख प्यास
इस मरजिये के स्वार्थ के लिए
या मानकर इसे किसी परमार्थ के लिए
हे बूँद, बन जाओ ना सीप का मोती...
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