Subodh dubey a lover of physics
Friday, November 30, 2012
आज फिर नींद काफूर हो गयी है
आज फिर आरजू मगरूर हो गयी है
आज फिर एक नयी मंजिल दिख गयी है
मौत फिर चार कदम दूर हो गयी है ""
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