Friday, November 30, 2012

सूरज कि किरणों के सम्मुख आज सुबह अलसाई होगी
केशो को सुलझाया होगा फिर थोड़ी मुस्काई होगी
दर्पण के अभिमुख हो कर के मेरी सूरत सोची होगी
फिर प्रभु कि मूरत में उसने मेरी मूरत देखि होगी
फिर चेहरें को स्वयं छिपा कर थोड़ी सी शरमाई होगी
सूरज कि किरणों के सम्मुख आज सुबह अलसाई होगी

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