तू जैसा है वैसा ही रह
इस दुनिया की परवाह न कर
तू जैसा है वैसा ही रह
इस दुनिया की परवाह न कर
ये दुनिया पागल समझेगी
आवारा घायल समझेगी
तेरे आँखों के आंशू को
कोई घटिया आयल समझेगी
इस मृगतृष्णा के धोखो से
दिल में अपने कड़वाह न भर
तू जैसा है वैसा ही रह
इस दुनिया की परवाह न कर
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