.""शमा गर जानती होती मोहब्बत चीज क्या कर है?
तो परवाना कभी भी मौत को परवान ना होता
वो जलती है जलाती है जलाकर बुझ भी जाती है
बेचारा गर समझ जाता कभी कुरबान ना होता"
तो परवाना कभी भी मौत को परवान ना होता
वो जलती है जलाती है जलाकर बुझ भी जाती है
बेचारा गर समझ जाता कभी कुरबान ना होता"
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